मैं प्रेम में पागल हूँ
यह कविता मीरा बाई की है, जो भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थीं। इस कविता में मीरा अपने प्रेम और पीड़ा को व्यक्त कर रही हैं। वह कहती हैं कि वह प्रेम में पागल हो गई हैं और उनकी पीड़ा को कोई नहीं समझता। केवल वही व्यक्ति जो स्वयं घायल है, दूसरे की पीड़ा को समझ सकता है। जैसे गहने की असली कीमत केवल जौहरी ही जानता है, वैसे ही मीरा की पीड़ा को भी कोई नहीं समझ सकता। वह अपने दर्द में इधर-उधर भटक रही हैं, लेकिन उन्हें कोई डॉक्टर नहीं मिलता। अंत में, मीरा भगवान कृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि जब वह श्याम के रूप में डॉक्टर बनकर आएंगे, तो उनका दर्द कम हो जाएगा। यह कविता मीरा की गहरी भक्ति और उनके भगवान के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाती है।
| Word | Hindi میں | سادہ (Hindi) | Pron. |
|---|---|---|---|
| पीड़ा | दर्द | तकलीफ या कष्ट जो किसी को महसूस होता है | peedaa |
| घायल | चोटिल | वह व्यक्ति जो चोट खाया हो | ghaayal |
| जौहरी | गहनों का जानकार | वह व्यक्ति जो गहनों की असली कीमत जानता है | jauhari |
| भटकती | घूमती | इधर-उधर फिरना | bhatakti |
| स्वामी | मालिक या भगवान | वह जिसे पूजा जाता है | swaami |
मीरा बाई एक प्रसिद्ध भक्ति कवयित्री थीं, जो भगवान कृष्ण की भक्त थीं। उनका जन्म राजस्थान के एक राजघराने में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन को कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया और उनकी कविताएँ प्रेम और भक्ति से ओतप्रोत हैं।
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