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मेरे तो गिरधर गोपालmere to girdhr gopal
मेरे तो गिरधर गोपाल मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई ॥ ता तनु मन धन सब अर्पौं, और न चाहूँ कोई मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई ॥ जाके चरण कमल में प्रीति, और न धरूँ लोई मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिलेंगे सोई ॥
मेरे तो गिरधर गोपाल मेरे तो गिरधर गोपाल, और कोई नहीं है। जिसके सिर पर मोर पंख का मुकुट है, वही मेरा पति है। मैं अपना शरीर, मन, और धन सब कुछ समर्पित करती हूँ, और किसी की इच्छा नहीं करती। मेरे तो गिरधर गोपाल, और कोई नहीं है। जिसके चरण कमलों में मेरा प्रेम है, और किसी से प्रेम नहीं करती। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आसानी से मिलेंगे वही।