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एक फूलek phul
एक फूल रात की किसी अंधी गाँठ में
घाव की तरह खुला है किसी बंजर प्रदेश में
और उसके रंग में जादू है टूटती हुई गृहस्थी,
छूटती हुई नौकरी, अपमान और असुरक्षा के तनाव में टूटते हुए मस्तिष्क से
निकली है कोई कविता जिसके क्रोध और दुख और घृणा में
कला है ख़ाली बरतनों, दवाइयों की शीशियों
और मृत्यु की गहरी गंध से भरे कमरे में
हँसता है वह ढाई साल का बच्चा और उसके दूधिया दाँतों में
ग़ज़ब की चमक है!
एक फूल रात के किसी अंधेरे कोने में
घाव की तरह खुला है किसी सूखी जगह में
और उसके रंग में जादू है बिखरते हुए परिवार में,
छूटती हुई नौकरी, अपमान और असुरक्षा के तनाव में टूटते हुए दिमाग से
निकली है कोई कविता जिसके गुस्से, दुख और नफरत में
कला है खाली बर्तनों, दवाइयों की बोतलों
और मौत की गहरी गंध से भरे कमरे में
हँसता है वह ढाई साल का बच्चा और उसके दूध जैसे दाँतों में
अद्भुत चमक है!