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बशीर बद्र की यह गज़ल प्रेम, दूरी और सामाजिक संबंधों की जटिलताओं को दर्शाती है। पहले शेर में, शायर कहता है, "यूं ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर भी रहा करो", जिसका अर्थ है कि बिना किसी कारण के घूमने की बजाय, कभी घर पर भी रहना चाहिए। यह एक भावनात्मक जुड़ाव का संकेत है। अगले शेर में, वह कहते हैं, "वो गज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो", यह दर्शाता है कि प्रेम की गहराई को समझने के लिए इसे चुपचाप पढ़ना चाहिए।
गज़ल के मध्य में, शायर सामाजिक संबंधों की जटिलताओं को उजागर करते हैं। वह कहते हैं, "कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से", यह दिखाता है कि आजकल के लोग जल्दी से गले नहीं मिलते हैं। फिर वह सलाह देते हैं कि "ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फासले से मिला करो", जिससे यह स्पष्ट होता है कि आज के समय में दूरी बनाए रखना आवश्यक है।
अगले शेर में, शायर प्रेम की कहानियों को इश्क़तर मानते हैं, जो उनकी गहराई को दर्शाती हैं। वह कहते हैं, "जो कहा नहीं वो सुना करो जो सुना नहीं वो कहा करो", यह प्रेम में संवाद की आवश्यकता को दर्शाता है। अंत में, वह कहते हैं, "ये तुम्हारे घर का बहार है इसे आँसुओं से हरा करो", जो यह दर्शाता है कि प्रेम की बहार को बनाए रखने के लिए प्रयास करना चाहिए। इस गज़ल में बशीर बद्र ने प्रेम, दूरी और सामाजिक संबंधों की जटिलताओं को खूबसूरती से व्यक्त किया है।
| Word | In Urdu | In Hindi | Pron. |
|---|---|---|---|
| यूं | इस तरह | इस तरह से | yun |
| ही | बस | सिर्फ | hi |
| बेसबब | बिना कारण | बिना वजह | besabab |
| न | नहीं | नहीं | na |
| फिरा | घूमना | घूमना | phira |
| करो | करें | करें | karo |
| कोई | कोई | कोई | koi |
| शाम | शाम | शाम | shaam |
| घर | घर | घर | ghar |
| भी | भी | भी | bhi |
| रहा | रहना | रहना | raha |
| वो | वह | वह | wo |
| गज़ल | गज़ल | गज़ल | ghazal |
| की | का | का | ki |
| सच्ची | सच्ची | सच्ची | sachchi |
| किताब | किताब | किताब | kitaab |
| है | है | है | hai |
| उसे | उसे | उसे | use |
| चुपके | चुपके | चुपके | chupke |
| पढ़ा | पढ़ना | पढ़ना | padha |
| हाथ | हाथ | हाथ | haath |
| मिलाएगा | मिलाना | मिलाना | milaega |
| जो | जो | जो | jo |
| गले | गले | गले | gale |
| मिलोगे | मिलना | मिलना | miloge |
| तपाक | जल्दी | जल्दी | tapaak |
| से | से | से | se |
| ये | ये | ये | ye |
| नए | नए | नए | naye |
| मिज़ाज | स्वभाव | स्वभाव | mizaaj |
| का | का | का | ka |
| शहर | शहर | शहर | shehar |
| ज़रा | थोड़ा | थोड़ा | zara |
| फासले | दूरी | दूरी | faasle |
| मिला | मिलना | मिलना | mila |
| अभी | अभी | अभी | abhi |
| राह | रास्ता | रास्ता | raah |
| में | में | में | mein |
| कई | कई | कई | kai |
| मोड़ | मोड़ | मोड़ | mod |
| हैं | हैं | हैं | hain |
| आएगा | आना | आना | aaega |
| जाएगा | जाना | जाना | jaayega |
| तुम्हें | तुम्हें | तुम्हें | tumhein |
| जिनसे | जिनसे | जिनसे | jinse |
| दिल | दिल | दिल | dil |
| ने | ने | ने | ne |
| भुला | भूलना | भूलना | bhula |
| दिया | दिया | दिया | diya |
| भूलने | भूलना | भूलना | bhoolne |
| दुआ | प्रार्थना | प्रार्थना | dua |
| मुझे | मुझे | मुझे | mujhe |
| इश्क़तर-सी | प्रेम जैसी | प्रेम जैसी | ishqtar-si |
| लगती | लगना | लगना | lagti |
| मोहब्बतों | प्रेम | प्रेम | mohabbatoun |
| कहानियां | कहानियाँ | कहानियाँ | kahaniyan |
| कहा | कहना | कहना | kaha |
| नहीं | नहीं | नहीं | nahi |
| सुना | सुनना | सुनना | suna |
| कभी | कभी | कभी | kabhi |
| हंसने | हंसना | हंसना | hansne |
| हो | होना | होना | ho |
| आशिक़ाना | प्रेमी | प्रेमी | aashiqana |
| लिबास | वस्त्र | वस्त्र | libaas |
| मैं | मैं | मैं | main |
| बन | बनाना | बनाना | ban |
| संवर | सजना | सजना | sanwar |
| के | का | का | ke |
| कहीं | कहीं | कहीं | kahin |
| चलूं | चलना | चलना | chalun |
| मेरे | मेरे | मेरे | mere |
| साथ | साथ | साथ | saath |
| तुम | तुम | तुम | tum |
| चला | चलना | चलना | chala |
| बेहिजाब² | बिना ढके | बिना ढके | behijab |
| चाँद | चाँद | चाँद | chaand |
| सा | जैसा | जैसा | sa |
| कि | कि | कि | ki |
| नज़र | दृष्टि | दृष्टि | nazar |
| असर | प्रभाव | प्रभाव | asar |
| इतनी | इतनी | इतनी | itni |
| गर्मी-ए-शौक़ | प्रेम की गर्मी | प्रेम की गर्मी | garmi-e-shauq |
| बड़ी | बड़ी | बड़ी | badi |
| देर | समय | समय | der |
| तक | तक | तक | tak |
| तका | देखना | देखना | taka |
| खिज़ाँ | पतझड़ | पतझड़ | khizaan |
| ज़र्द-सी | पीली | पीली | zard-si |
| शाल | चादर | चादर | shaala |
| उदास | उदास | उदास | udaas |
| पेड़ | पेड़ | पेड़ | ped |
| पास | नजदीक | नजदीक | paas |
| तुम्हारे | तुम्हारे | तुम्हारे | tumhare |
| बहार | बहार | बहार | bahaar |
| इसे | इसे | इसे | ise |
| आंसुओं | आंसू | आंसू | aansuon |
| हरा | हरा | हरा | hara |
बशीर बद्र एक प्रसिद्ध उर्दू शायर हैं, जिनका जन्म 1926 में हुआ। वे अपनी गज़लों के लिए जाने जाते हैं, जो प्रेम और जीवन के गहरे भावनाओं को व्यक्त करती हैं।
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