कविता विश्लेषण

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बशीर बद्रUrdu16 पंक्तियाँ1 सार्वजनिक विश्लेषण
Original Poetry
Translation
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बिना वजह यहाँ वहाँ मत घूमो, कभी शाम को घर भी रहो
यूं ही बेसबब फिरा करो, कोई शाम घर भी रहा करो
वह गज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके से पढ़ा करो
वो गज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो
कोई हाथ भी मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
कोई हाथ नहीं मिलाएगा, अगर तुम जल्दी गले मिलोगे
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फासले से मिला करो
यह नया शहर है, थोड़ा फासले से मिला करो
अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा
अभी रास्ते में कई मोड़ हैं, कोई आएगा, कोई जाएगा
तुम्हें जिनसे दिल ने भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो
जिन्हें दिल ने भुला दिया है, उन्हें भूलने की दुआ करो
मुझे इश्क़तर-सी लगती हैं ये मोहब्बतों की कहानियां
ये मोहब्बतों की कहानियाँ मुझे इश्क़तर लगती हैं
जो कहा नहीं वो सुना करो जो सुना नहीं वो कहा करो
जो कहा नहीं, वो सुनो, जो सुना नहीं, वो कहो
कभी हंसने पढ़ा नहीं भी हो ज़रा आशिक़ाना लिबास में
कभी हंसने का मौका नहीं मिला, थोड़ा आशिक़ाना लिबास पहन लो
जो मैं बन संवर के कहीं चलूं मेरे साथ तुम भी चला करो
अगर मैं सज-धज के कहीं चलूं, तो तुम भी मेरे साथ चलो
नहीं बेहिजाब² वो चाँद सा कि नज़र का कोई असर हो
वह चाँद जैसा बेहिजाब नहीं है कि नज़र का कोई असर न हो
उसे इतनी गर्मी-ए-शौक़ से बड़ी देर तक तका करो
उसे इतनी गर्मी-ए-शौक़ से देर तक मत देखो
ये ख़िज़ाँ की ज़र्द-सी शाल में जो उदास पेड़ के पास है
ये ख़िज़ाँ की ज़र्द-सी शाल में उदास पेड़ के पास है
ये तुम्हारे घर का बहार है इसे आँसुओं से हरा करो
ये तुम्हारे घर की बहार है, इसे आँसुओं से हरा करो
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Explanation

बशीर बद्र की यह गज़ल प्रेम, दूरी और सामाजिक संबंधों की जटिलताओं को दर्शाती है। पहले शेर में, शायर कहता है, "यूं ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर भी रहा करो", जिसका अर्थ है कि बिना किसी कारण के घूमने की बजाय, कभी घर पर भी रहना चाहिए। यह एक भावनात्मक जुड़ाव का संकेत है। अगले शेर में, वह कहते हैं, "वो गज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो", यह दर्शाता है कि प्रेम की गहराई को समझने के लिए इसे चुपचाप पढ़ना चाहिए।

गज़ल के मध्य में, शायर सामाजिक संबंधों की जटिलताओं को उजागर करते हैं। वह कहते हैं, "कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से", यह दिखाता है कि आजकल के लोग जल्दी से गले नहीं मिलते हैं। फिर वह सलाह देते हैं कि "ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फासले से मिला करो", जिससे यह स्पष्ट होता है कि आज के समय में दूरी बनाए रखना आवश्यक है।

अगले शेर में, शायर प्रेम की कहानियों को इश्क़तर मानते हैं, जो उनकी गहराई को दर्शाती हैं। वह कहते हैं, "जो कहा नहीं वो सुना करो जो सुना नहीं वो कहा करो", यह प्रेम में संवाद की आवश्यकता को दर्शाता है। अंत में, वह कहते हैं, "ये तुम्हारे घर का बहार है इसे आँसुओं से हरा करो", जो यह दर्शाता है कि प्रेम की बहार को बनाए रखने के लिए प्रयास करना चाहिए। इस गज़ल में बशीर बद्र ने प्रेम, दूरी और सामाजिक संबंधों की जटिलताओं को खूबसूरती से व्यक्त किया है।

Word Dictionary97

WordIn UrduIn HindiPron.
यूंइस तरहइस तरह सेyun
हीबससिर्फhi
बेसबबबिना कारणबिना वजहbesabab
नहींनहींna
फिराघूमनाघूमनाphira
करोकरेंकरेंkaro
कोईकोईकोईkoi
शामशामशामshaam
घरघरघरghar
भीभीभीbhi
रहारहनारहनाraha
वोवहवहwo
गज़लगज़लगज़लghazal
कीकाकाki
सच्चीसच्चीसच्चीsachchi
किताबकिताबकिताबkitaab
हैहैहैhai
उसेउसेउसेuse
चुपकेचुपकेचुपकेchupke
पढ़ापढ़नापढ़नाpadha
हाथहाथहाथhaath
मिलाएगामिलानामिलानाmilaega
जोजोजोjo
गलेगलेगलेgale
मिलोगेमिलनामिलनाmiloge
तपाकजल्दीजल्दीtapaak
सेसेसेse
येयेयेye
नएनएनएnaye
मिज़ाजस्वभावस्वभावmizaaj
काकाकाka
शहरशहरशहरshehar
ज़राथोड़ाथोड़ाzara
फासलेदूरीदूरीfaasle
मिलामिलनामिलनाmila
अभीअभीअभीabhi
राहरास्तारास्ताraah
मेंमेंमेंmein
कईकईकईkai
मोड़मोड़मोड़mod
हैंहैंहैंhain
आएगाआनाआनाaaega
जाएगाजानाजानाjaayega
तुम्हेंतुम्हेंतुम्हेंtumhein
जिनसेजिनसेजिनसेjinse
दिलदिलदिलdil
नेनेनेne
भुलाभूलनाभूलनाbhula
दियादियादियाdiya
भूलनेभूलनाभूलनाbhoolne
दुआप्रार्थनाप्रार्थनाdua
मुझेमुझेमुझेmujhe
इश्क़तर-सीप्रेम जैसीप्रेम जैसीishqtar-si
लगतीलगनालगनाlagti
मोहब्बतोंप्रेमप्रेमmohabbatoun
कहानियांकहानियाँकहानियाँkahaniyan
कहाकहनाकहनाkaha
नहींनहींनहींnahi
सुनासुननासुननाsuna
कभीकभीकभीkabhi
हंसनेहंसनाहंसनाhansne
होहोनाहोनाho
आशिक़ानाप्रेमीप्रेमीaashiqana
लिबासवस्त्रवस्त्रlibaas
मैंमैंमैंmain
बनबनानाबनानाban
संवरसजनासजनाsanwar
केकाकाke
कहींकहींकहींkahin
चलूंचलनाचलनाchalun
मेरेमेरेमेरेmere
साथसाथसाथsaath
तुमतुमतुमtum
चलाचलनाचलनाchala
बेहिजाब²बिना ढकेबिना ढकेbehijab
चाँदचाँदचाँदchaand
साजैसाजैसाsa
किकिकिki
नज़रदृष्टिदृष्टिnazar
असरप्रभावप्रभावasar
इतनीइतनीइतनीitni
गर्मी-ए-शौक़प्रेम की गर्मीप्रेम की गर्मीgarmi-e-shauq
बड़ीबड़ीबड़ीbadi
देरसमयसमयder
तकतकतकtak
तकादेखनादेखनाtaka
खिज़ाँपतझड़पतझड़khizaan
ज़र्द-सीपीलीपीलीzard-si
शालचादरचादरshaala
उदासउदासउदासudaas
पेड़पेड़पेड़ped
पासनजदीकनजदीकpaas
तुम्हारेतुम्हारेतुम्हारेtumhare
बहारबहारबहारbahaar
इसेइसेइसेise
आंसुओंआंसूआंसूaansuon
हराहराहराhara

Poet & Context

Era20वीं सदी

बशीर बद्र एक प्रसिद्ध उर्दू शायर हैं, जिनका जन्म 1926 में हुआ। वे अपनी गज़लों के लिए जाने जाते हैं, जो प्रेम और जीवन के गहरे भावनाओं को व्यक्त करती हैं।

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When20वीं सदी
Whyयह गज़ल प्रेम, दूरी और सामाजिक संबंधों की जटिलताओं को दर्शाती है।
Formगज़ल

Themes & More

प्रेमदूरीसामाजिक संबंध
उपमा: चाँद की उपमा दी गई हैअनुप्रास: 'करो' का पुनरावृत्तिचित्रण: पेड़ और बहार का चित्रण
``` — बशीर बद्र | AI कविता विश्लेषण