मेरे तो गिरधर गोपाल

मीराबाईHindi7 lines1 public analyses
Original Poetry
Translation
मेरे तो गिरधर गोपाल
मेरे तो गिरधर गोपाल
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो कोई
मेरे तो गिरधर गोपाल, और कोई नहीं है।
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई
जिसके सिर पर मोर पंख का मुकुट है, वही मेरा पति है।
ता तनु मन धन सब अर्पौं, और चाहूँ कोई
मैं अपना शरीर, मन, और धन सब कुछ समर्पित करती हूँ, और किसी की इच्छा नहीं करती।
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो कोई
मेरे तो गिरधर गोपाल, और कोई नहीं है।
जाके चरण कमल में प्रीति, और धरूँ लोई
जिसके चरण कमलों में मेरा प्रेम है, और किसी से प्रेम नहीं करती।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिलेंगे सोई
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आसानी से मिलेंगे वही।
 

Explanation

यह भजन मीराबाई की भगवान कृष्ण के प्रति असीम भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। मीराबाई कहती हैं कि उनके लिए केवल गिरधर गोपाल ही सब कुछ हैं और उनके अलावा कोई और नहीं है। वह अपने तन, मन और धन को गिरधर गोपाल को समर्पित करती हैं और किसी और की चाह नहीं रखतीं। उनके लिए गिरधर गोपाल ही उनके पति हैं और वे उनके चरण कमलों में प्रेम करती हैं। मीराबाई का यह भजन भक्ति के उच्चतम स्तर को दर्शाता है जहाँ भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम व्यक्त करता है। यह भजन भक्ति काल की विशेषताओं को दर्शाता है जहाँ भक्त और भगवान के बीच का संबंध अत्यंत व्यक्तिगत और प्रेमपूर्ण होता है।

Word Dictionary8

WordIn HindiPlain (Hindi)Pron.
गिरधरकृष्णकृष्ण का नामgiridhar
गोपालकृष्णगायों के रक्षकgopaal
मोर मुकुटमोर पंख का मुकुटकृष्ण का मुकुटmor mukut
अर्पौंसमर्पित करूँदेनाarpau
चरण कमलपवित्र पैरभगवान के पैरcharan kamal
प्रभुभगवानईश्वरprabhu
नागरशहरवासीकृष्ण के लिएnaagar
सहजआसानी सेआसानी सेsahaj

Poet & Context

Eraभक्ति काल

मीराबाई एक प्रसिद्ध भारतीय संत और कवयित्री थीं, जो भगवान कृष्ण की भक्त थीं। उनका जन्म 1498 में राजस्थान के मेड़ता में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन को कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया और उनकी रचनाएँ भक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा…

View on Wikipedia
Whenभक्ति काल (15वीं-17वीं शताब्दी)
Whyयह भजन मीराबाई की भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। उन्होंने अपने जीवन को कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया था और यह भजन उनकी उसी भक्ति का प्रतीक है।
Formभजन

Themes & More

भक्तिप्रेमसमर्पण
अनुप्रास: 'गिरधर गोपाल' में 'ग' ध्वनि की पुनरावृत्तिउपमा: 'मोर मुकुट' का उपयोग भगवान कृष्ण के लिएरूपक: 'चरण कमल' का प्रयोग भगवान के चरणों के लिए
मेरे तो गिरधर गोपाल by मीराबाई — Poem, Translation & Meaning