कब चोबदार पर हों सर-अफ़राज़ देखिए

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Original Poetry

कब चोबदार पर हों सर-अफ़राज़ देखिए उस शोख़ की निगाह में आए हुए तो हैं

Translation

देखें कब दरबान पर सिर ऊँचा होगा उस सुंदर की नजर में तो आ ही गए हैं

Explanation

यह कविता उर्दू ग़ज़ल का एक हिस्सा है, जिसमें प्रेम और सौंदर्य की भावना को व्यक्त किया गया है। पहले पंक्ति में, कवि यह कहता है कि वह देखना चाहता है कि कब दरबान (चोबदार) पर उसका सिर ऊँचा होगा, जो एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है। यह दरबान के सामने सम्मान या गर्व की स्थिति को दर्शाता है। दूसरी पंक्ति में, कवि यह कहता है कि वह उस शोख (सुंदर) की नजर में आ चुका है। यहाँ 'शोख' शब्द का उपयोग किसी प्रिय या आकर्षक व्यक्ति के लिए किया गया है। इस प्रकार, यह कविता प्रेम और आकर्षण की भावना को उकेरती है।

Word Dictionary

WordEasy MeaningTranslationPron.
चोबदारदरबानवह व्यक्ति जो दरवाजे पर खड़ा होता है और आगंतुकों की देखरेख करता हैchobdaar
सर-अफ़राज़सम्मानितजिसका सिर ऊँचा हो, गर्वितsar-afraaz
शोख़सुंदरखूबसूरतshokh
निगाहदृष्टिनज़रnigaah

Poet & Context

Poet
EraModern Urdu Poetry

इस कविता के लेखक की पहचान नहीं हो सकी है। यह कविता आधुनिक उर्दू कविता के युग से संबंधित है। उर्दू कविता भारतीय और पाकिस्तानी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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WhenModern Era
Whyयह कविता उर्दू शायरी की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है, जो अक्सर प्रेम, सौंदर्य और सामाजिक परिस्थितियों पर केंद्रित होती है।
FormGhazal

Themes & More

प्रेमआकर्षण
प्रतीक: 'चोबदार' और 'सर-अफ़राज़' का उपयोग सम्मान और गर्व के प्रतीक के रूप में किया गया हैउपमा: 'शोख़' शब्द का उपयोग सुंदरता के लिए किया गया है
कब चोबदार पर हों सर-अफ़राज़ देखिए — Poem | Poetry Explainer